सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यूपी में बाह्य विकास शुल्क (Outer Development Fee) की नई नीति बनाई जाए, जिसमें भूमि पर लगने वाला शुल्क भूमि का क्षेत्र (area) और उपयोग (usage) के आधार पर तय किया जाए। 


नीचे मुख्य बिंदु दिए गए हैं:



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🔍 मुख्य निर्देश और प्रस्तावित नियम


1. स्थान व उपयोग के आधार पर दरों में अंतर


नगर निकायों (शहर) की सीमा के अंदर की भूमि और उस सीमा के बाहर की भूमि पर अलग-अलग दरें हों। 


आवासीय एवं व्यावसायिक उपयोग वाली भूमि पर अधिक शुल्क, जबकि कृषि और औद्योगिक उपयोग वाली भूमि पर कम शुल्क होगा। 




2. पारदर्शिता एवं सरल गणना


शुल्क निर्धारण का फॉर्मूला स्पष्ट और ऑनलाइन हो, ताकि आम व्यक्ति भी खुद से अनुमान लगा सके। 


हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा जाए। 




3. उपलब्ध सुविधाओं में निवेश


जो राशि बाह्य विकास शुल्क से मिलेगी, उसे सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली आदि अवसंरचनात्मक विकास में लगाया जाए। 


विकास प्राधिकरणों की जवाबदेही सुनिश्चित हो। 




4. नवीन पुनर्विकास नीति के साथ समन्वय


यह नई शुल्क नीति “शहरी पुनर्विकास नीति” के प्रावधानों के साथ जुड़ी होगी। 


पुराने या जर्जर क्षेत्रों के पुनर्विकास एवं पुनर्निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाना है। 






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