UP Outsource Employee Salary Chart: यूपी आउटसोर्स कर्मचारी को मिलेगा 20000 से लेकर 40000 वेतन , सैलरी चार्ट हुआ जारी
नीचे यूपी (उत्तर प्रदेश) सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन और अन्य लाभों से जुड़ी जानकारी दी गई है:
इस चार्ट में वेतनरूप नीचे दी गई श्रेणियों के अनुसार विभाजित है:
श्रेणी सेवाएँ / पद न्यूनतम मासिक वेतन
श्रेणी–1 चिकित्सीय, अभियंत्रण स्तर 1, व्याख्यान, परियोजना प्रबंधन, लेखा स्तर 1, वरिष्ठ अनुसंधान इत्यादि ₹40,000
श्रेणी–2 कार्यालय स्तर 2, आशुलिपिक स्तर 2, लेखा स्तर 2, डाटा प्रोसेसिंग स्तर 2, कला शिक्षण, एक्स-रे, नर्सिंग, फार्मेसी, परामर्श, सांख्यिकी इत्यादि ₹25,000
श्रेणी–3 कार्यालय स्तर 3, आशुलिपिक स्तर 3, टंकण, दूरसंचार, भंडारण, फोटोग्राफी, पुस्तकालय, इलेक्ट्रिशियन, मिस्त्री, प्रयोगशाला संचालन, पैरामेडिकल, वाहन चालक इत्यादि ₹22,000
श्रेणी–4 ऑफिस अधीनस्थ स्तर 4, संधारण, लिफ्ट ऑपरेटर, डाक, खान-पान, बागवानी, श्रम, यांत्रिक, विद्युत, सैनिटेशन, पंपिंग, सुरक्षा इत्यादि (47 अतिविशिष्ट सेवाएँ) ₹20,000
यह जानकारी SRBM Times की रिपोर्ट पर आधारित है।
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अन्य महत्वपूर्ण अपडेट और सरकारी पहल:
न्यूनतम वेतन संरचना
अब आउटसोर्स कर्मचारियों को चार स्पष्ट श्रेणियों के अंतर्गत ₹20,000, ₹22,000, ₹25,000 या ₹40,000 मासिक वेतन की व्यवस्था की गई है। यह कदम पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
आउटसोर्स सेवा निगम का गठन
यूपी सरकार ने "उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड" (एक सेक्शन 8 नॉन-प्रॉफिट पब्लिक कंपनी) के गठन को मंजूरी दी है। इस निगम के माध्यम से GeM पोर्टल पर माध्यमों का चयन और वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। कर्मचारियों को प्रतिमाह ₹16,000–₹20,000 तक मानदेय, EPF और ESI जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ, बैंक खाते में सीधे भुगतान, आरक्षण, मातृत्व अवकाश, प्रशिक्षण तथा मृत्यु की स्थिति में ₹15,000 अंतिम संस्कार सहायता जैसी सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
कांग्रेस के नेता उदित राज ने इस नीति की आलोचना करते हुए कहा है कि यह असंगठित श्रमिकों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार है। उन्होंने कहा कि तीन साल की अस्थायी नियुक्ति और ₹16,000–₹20,000 वेतन नीति, सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्णयों के विपरीत है, जो उन्हें नियमित करने की बात कहता था। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस नीति को नहीं बदलती, तो राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
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संक्षेप में:
आउटसोर्स कर्मचारियों को अब श्रेणी–आधारित वेतन (₹20,000 से ₹40,000) प्रदान किया जाएगा।
ऑफिशियल प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने हेतु एक आउटसोर्स सेवा निगम की स्थापना की गई है।
इसमें सामाजिक सुरक्षा, आरक्षण और अन्य लाभ शामिल हैं।
हालांकि, कुछ राजनीतिक विपक्ष ने इस नीति को असंगठित श्रमिकों के हितों के खिलाफ बताया है।
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